श्रीकृष्ण की दिव्य लीला — वृंदावन के वनों से निधिवन के शाश्वत रास तक।

हर शाम वृंदावन के एक छोटे-से वन के द्वार बाहर से बंद कर दिए जाते हैं। बंदर तक दीवारें लाँघकर निकल जाते हैं। क्योंकि कहते हैं, अँधेरा होते ही यहाँ आज भी श्रीकृष्ण रास रचाते हैं — और जो देखने रुका, वह होश में नहीं लौटा।

मथुरा का नाम पड़ने से पहले यहाँ मधु का वन था। यहीं पाँच वर्ष का एक राजकुमार एक पैर पर ऐसा अडिग खड़ा हुआ कि स्वर्ग काँप उठा, यहीं राम के सबसे छोटे भाई ने एक असुर का वध किया — और युगों बाद इसी पावन भूमि पर श्रीकृष्ण ने गायें चराईं।

यदि राधा ने कृष्ण से वैसा प्रेम किया जैसा कभी किसी ने नहीं किया, तो वे मथुरा क्यों चले गए और रुक्मिणी से विवाह क्यों किया? भक्ति परंपरा का उत्तर त्रासदी नहीं — सार है।

वे मथुरा चले गए और फिर कभी वृंदावन नहीं लौटे। कहा जाता है राधा ने शेष जीवन प्रतीक्षा में बिताया — और दोनों का सच्चा मिलन केवल उनकी अंतिम साँस में हुआ।