हरियाणा
कुरुक्षेत्र
धर्मक्षेत्र, जहाँ अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ अठारह दिन भिड़ीं — और जहाँ दो ठहरी हुई सेनाओं के बीच श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता सुनाई।
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अभिमन्यु — जिसने आधा रहस्य गर्भ में ही सीख लिया था
जन्म से पहले ही उसने संसार की सबसे घातक व्यूह-रचना में घुसने का मार्ग सुन लिया था — पर निकलने का मार्ग बताया जाता, उससे पहले माँ सो गई। कुरुक्षेत्र के तेरहवें दिन सोलह वर्ष का एक किशोर जानते-बूझते उस मृत्यु-चक्र में अकेला उतर गया।

कर्ण — सूर्यपुत्र जिसने रक्त से ऊपर निष्ठा को चुना
वरदान से जन्मे, नदी में बहाए गए, सारथी द्वारा पाले गए, अपने ही गुरु से शापित — कर्ण का सम्पूर्ण जीवन इस बात की परीक्षा था कि क्या महानता को किसी की अनुमति चाहिए।